Top News

क्या भारत में 500, 200 और 100 रुपये के नोट बंद होने वाले हैं? RBI के पॉलीमर नोट प्लान की पूरी सच्चाई ?





सोशल मीडिया और कई न्यूज़ वेबसाइट्स पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जल्द ही 500, 200 और 100 रुपये के मौजूदा नोटों को बंद कर सकता है और उनकी जगह प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट लाए जा सकते हैं। खबर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। 

क्या फिर से नोटबंदी होने वाली है? क्या पुराने नोट अचानक बेकार हो जाएंगे? और आखिर RBI पॉलीमर नोटों पर विचार क्यों कर रहा है?

पॉलीमर नोट क्या होते हैं?

पॉलीमर नोट प्लास्टिक  से बनाए जाते हैं। ये  कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित माने जाते हैं,आज दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन में पॉलीमर नोटों का उपयोग किया जा रहा है।

इन नोटों में आमतौर पर: 

पारदर्शी सिक्योरिटी विंडो होलोग्राम तकनीक उन्नत सुरक्षा फीचर्स अधिक टिकाऊ सामग्री जैसी विशेषताएं होती हैं।

क्या भारत में फिर से नोटबंदी होने वाली है?

इस समय ऐसी कोई  घोषणा नहीं हुई है कि 500, 200 या 100 रुपये के नोट अचानक अमान्य घोषित किए जाएंगे, यदि भविष्य में पॉलीमर नोट लागू होते हैं, तो प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी, बैंक पुराने नोटों को वापस लेते जाएंगे और उनकी जगह नए नोट जारी किए जा सकते हैं।

यह प्रक्रिया 2000 रुपये के नोटों की तरह हो सकती है।

भारत पहले भी कर चुका है पॉलीमर नोट का इस्तेमाल 

बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत ने 2012 में पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया था। तब 10 रुपये के पॉलीमर नोट कुछ चुनिंदा शहरों में जारी किए गए थे, जिनमें शामिल थे -

कोच्चि,मैसूर ,जयपुर ,भुवनेश्वर ,शिमला  यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल नहीं हो पाया और बाद में इसे आगे नहीं बढ़ाया गया।

RBI पॉलीमर नोट क्यों लाना चाहता है?

1. नोटों की उम्र बढ़ाना

 कागज़ी नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और खराब हो जाते हैं,पॉलीमर नोटों की उम्र कागज़ी नोटों की तुलना में लगभग 3 से 4 गुना अधिक होती है,इससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम हो जाती है।

2. प्रिंटिंग लागत में बचत

हालांकि पॉलीमर नोटों को बनाना महंगा होता है, लेकिन उनकी लंबी उम्र के कारण लंबे समय में सरकार का खर्च कम हो सकता है,भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये नोटों की छपाई और खराब नोटों के निपटान पर खर्च करता है।

3. नकली नोटों पर रोक

भारत में नकली करेंसी एक बड़ी समस्या रही है।

पालीमर नोटों में मौजूद सुरक्षा फीचर्स नकली नोट बनाना बेहद कठिन बना देते हैं,यही कारण है कि कई देशों ने पॉलीमर नोटों को अपनाया।

कनाडा का उदाहरण

कनाडा ने 2011 में पॉलीमर नोट लागू किए थे,उस समय देश में नकली नोटों की समस्या काफी गंभीर थी।

पॉलीमर नोट आने के बाद:

नकली नोटों में 90% से अधिक की कमी आई।सुरक्षा फीचर्स मजबूत हुए।नोटों की लाइफ बढ़ गई।यही मॉडल भारत के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

क्या 500 रुपये का नोट बंद हो जाएगा?

फिलहाल ऐसा कोई  फैसला नहीं लिया गया है।हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार धीरे-धीरे उच्च मूल्य वाले नोटों की संख्या कम कर सकती है और छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को बढ़ावा दे सकती है।

लेकिन इस बारे में RBI की तरफ से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

क्या डिजिटल भुगतान इसका कारण है?

भारत में UPI और डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़े हैं, लेकिन नकद लेनदेन अभी भी बहुत बड़ा है।

देश में लाखों करोड़ रुपये की नकदी अभी भी सर्कुलेशन में है।

सरकार नकद लेनदेन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है, इसलिए नई तकनीक वाले नोट भविष्य की योजना का हिस्सा हो सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत में पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा नई नहीं है। RBI पहले भी इसका परीक्षण कर चुका है और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, वर्तमान में 500, 200 और 100 रुपये के नोटों को  बंद करने या नई नोटबंदी जैसी कोई  घोषणा नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। किसी भी बड़े बदलाव से पहले RBI और सरकार आधिकारिक सूचना जारी करेंगे।

Post a Comment

और नया पुराने