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अजीत डोभाल की पूरी कहानी: IPS से भारत के NSA तक, जासूसी,और ऑपरेशन ब्लैक थंडर



India NSA :अजीत डोभाल की पूरी कहानी 

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा  की बात हो और अजीत डोभाल का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। उन्हें भारत का "मास्टर स्पाई", "आधुनिक चाणक्य" और देश के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) में से एक माना जाता है। उनका जीवन जासूसी, खुफिया अभियानों, आतंकवाद विरोधी और राजनीतिक विवादों से भरा रहा है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में मेजर थे, शिक्षा राजस्थान के अजमेर स्थित सैन्य विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की,1968 में उन्होंने UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हो गए। उन्हें केरल कैडर आवंटित किया गया।

थलास्सेरी दंगों से मिली पहली बड़ी पहचान

1971-72 में केरल के थलास्सेरी क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। हालात इतने खराब थे कि पुलिस भी प्रभावित क्षेत्रों में जाने से डर रही थी। ऐसे समय में युवा IPS अधिकारी अजीत डोभाल को स्थिति संभालने की जिम्मेदारी दी गई, डोभाल ने बल प्रयोग की बजाय खुफिया जानकारी जुटाने और स्थानीय नेतृत्व से संवाद की रणनीति अपनाई। उन्होंने लूटा गया सामान वापस दिलवाया और कुछ ही दिनों में दंगों को नियंत्रित कर लिया। इस सफलता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

इंटेलिजेंस ब्यूरो में प्रवेश

दंगों को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के बाद अजीत डोभाल को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में भेजा गया। यहीं से उनके खुफिया अभियानों की शुरुआत हुई।

मिजोरम मिशन: विद्रोहियों को मुख्यधारा में लाने की रणनीति

1970 के दशक में मिजोरम में अलगाववादी आंदोलन अपने चरम पर था। मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) भारत से अलग होने की मांग कर रहा था,अजीत डोभाल को मिजोरम भेजा गया, जहां उन्होंने विद्रोही कमांडरों का विश्वास जीतने में सफलता हासिल की। बताया जाता है कि उन्होंने कई प्रमुख कमांडरों को सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार किया। इसके बाद शांति प्रक्रिया आगे बढ़ी और  मिजोरम भारत के सबसे शांत राज्यों में शामिल हो गया।

सिक्किम के भारत में विलय के दौरान भूमिका

1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ। विभिन्न स्रोतों के अनुसार इस प्रक्रिया में भारतीय खुफिया एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अजीत डोभाल भी उन अधिकारियों में शामिल थे जिन्होंने राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन

अजीत डोभाल कई वर्षों तक पाकिस्तान में अंडरकवर ऑपरेशनों से जुड़े रहे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और आतंकी नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में योगदान दिया।इसी दौर ने उन्हें भारत के सबसे अनुभवी खुफिया अधिकारियों में शामिल कर दिया।

ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988)

1988 में खालिस्तानी आतंकियों ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में शरण ले ली थी। ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान अजीत डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि उन्होंने आतंकियों के बीच जाकर खुफिया जानकारी जुटाई और सुरक्षा बलों को सूचना उपलब्ध कराई। इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि इसे ऑपरेशन ब्लू स्टार की तुलना में कहीं अधिक नियंत्रित और सफल माना गया।

IC-814 विमान अपहरण 

1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 का अपहरण कर लिया गया। विमान को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया।सरकार द्वारा भेजी गई  टीम में अजीत डोभाल भी शामिल थे। उन्होंने अपहरणकर्ताओं के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  यात्रियों की रिहाई के लिए भारत को तीन आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा, लेकिन यह घटना भारतीय सुरक्षा इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिनी जाती है।

दाऊद इब्राहिम को पकड़ने की कोशिश

रिटायरमेंट के बाद भी अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सक्रिय रहे।  मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम तक पहुंचने के कई प्रयास किए। 

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन और सार्वजनिक जीवन

सेवानिवृत्ति के बाद अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा  मामलों पर  विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) से जुड़कर काम किया। यह थिंक टैंक राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति विषयों पर शोध करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बनने का सफर

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया, NSA बनने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में भूमिका निभाई, जिनमें शामिल हैं:

इराक से भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी

म्यांमार में आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई

उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक

बालाकोट एयर स्ट्राइक

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 

क्यों कहा जाता है भारत का "चाणक्य"?

अजीत डोभाल की पहचान केवल एक पूर्व IPS अधिकारी के रूप में नहीं है। उन्हें एक ऐसे रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है जिसने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को अधिक सक्रिय और आक्रामक देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी , खुफिया अभियानों और सुरक्षा मामलों में प्रभाव के कारण उन्हें आधुनिक भारत का "चाणक्य" कहा जाता है।

निष्कर्ष

अजीत डोभाल का जीवन भारतीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। IPS अधिकारी से लेकर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने तक उनका सफर असाधारण रहा है। उनके समर्थक उन्हें भारत की सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ मानते हैं, जबकि उनके निर्णयों और प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हैं। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि अजीत डोभाल भारत की सुरक्षा व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं।

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