आईपीएल में एग्रेसन, स्लेजिंग और ऑन-फील्ड बैंटर कोई नई बात नहीं है। खासकर जब बात Virat Kohli जैसे इमोशनल और हाई-इंटेंसिटी खिलाड़ी की हो, तो मैदान पर गर्म माहौल बनना लगभग तय होता है। दूसरी तरफ Travis Head जैसे ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी हैं, जिनकी क्रिकेटिंग मानसिकता हमेशा से “टक्कर दो और जवाब लो” वाली रही है।
लेकिन इस बार मामला सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा। मैच खत्म होने के बाद जो हैंडशेक मोमेंट हुआ, उसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। सवाल यही है — गलती किसकी थी? और क्या इस विवाद को इतना बड़ा बनाया जाना चाहिए?
क्या हुआ था मैच में?
मैच में सनराइजर्स हैदराबाद और आरसीबी के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला चल रहा था। एसआरएच ने 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। दूसरी पारी में आरसीबी की उम्मीदें काफी हद तक विराट कोहली पर टिकी थीं।
इसी दौरान एक दिलचस्प मोमेंट आया। शिवम की स्पिन गेंदबाजी पर ट्रेविस हेड लगातार आक्रामक शॉट खेल रहे थे। तभी विराट और ट्रेविस के बीच कुछ बातचीत हुई। वायरल वीडियो में ऐसा लगा कि विराट मजाकिया अंदाज में कह रहे थे:
“आ जा भाई, तू भी ऑफ स्पिन डाल ले।”
उस समय माहौल हल्का-फुल्का दिख रहा था। कमेंटेटर्स भी इसे मजेदार बैंटर मान रहे थे। लेकिन अगले ही ओवर में कहानी पलट गई।
विराट का विकेट और ट्रेविस हेड का जवाब
जब विराट कोहली आउट हुए, तब ट्रेविस हेड की तरफ से एक लाइन आई जिसने पूरे विवाद को हवा दे दी।
उन्होंने कहा:
“Mate, you got out before I even came to bowl.”
यानी, “मैं गेंदबाजी करने आता उससे पहले ही तुम आउट हो गए।”
ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट में इस तरह की छेड़छाड़ बहुत सामान्य मानी जाती है। लेकिन विराट के फैंस को यह लाइन काफी disrespectful लगी। दूसरी तरफ कई लोगों का कहना था कि विराट ने पहले मजाक किया था, इसलिए हेड ने सिर्फ जवाब दिया।यहीं से सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया।
हैंडशेक वाला पल क्यों बना बड़ा मुद्दा?
मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिला रहे थे। ट्रेविस हेड ने विराट की तरफ हाथ बढ़ाया, लेकिन विराट आगे निकल गए। उन्होंने दूसरे खिलाड़ियों से हाथ मिलाया, लेकिन हेड के साथ हैंडशेक नहीं हुआ।
ट्रेविस हेड पलटकर देखते भी नजर आए, जैसे उन्हें उम्मीद थी कि विराट हाथ मिलाएंगे।
यहीं से मामला “ऑन-फील्ड बैंटर” से “पर्सनल क्लैश” में बदल गया।
कमेंटेटर्स तक हैरान थे क्योंकि आईपीएल में तीखी लड़ाइयों के बाद भी खिलाड़ी अक्सर मैच खत्म होने पर एक-दूसरे को रिस्पेक्ट देते दिखते हैं। यही स्पोर्ट्समैनशिप की पहचान मानी जाती है।
क्या विराट ओवर-एग्रेसिव हो गए थे?
यह सवाल काफी महत्वपूर्ण है।
विराट कोहली हमेशा से इमोशनल खिलाड़ी रहे हैं। उनका aggression ही उनकी ताकत भी है। लेकिन कई बार यही aggression उल्टा नुकसान भी कर देता है।
कई क्रिकेट फैंस का मानना है कि ट्रेविस हेड के कमेंट के बाद विराट थोड़ा ट्रिगर हो गए। वह अपने नैचुरल गेम से ज्यादा एग्रेसिव दिखे और जल्दी आउट हो गए। अगर वह शांत रहते, तो शायद मैच का नैरेटिव अलग होता। क्रिकेट इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां खिलाड़ियों ने गुस्से को मोटिवेशन में बदला। जैसे Yuvraj Singh ने एंड्रयू फ्लिंटॉफ की स्लेजिंग के बाद Stuart Broad को छह छक्के मार दिए थे।
फैंस यही उम्मीद विराट से भी कर रहे थे — जवाब बल्ले से आए, रिएक्शन से नहीं।
क्या विवाद की शुरुआत ट्रेविस हेड ने की थी?
पूरी कहानी सिर्फ दूसरी पारी की नहीं थी।
पहली पारी में जब ट्रेविस हेड बल्लेबाजी कर रहे थे, उन्होंने आरसीबी के गेंदबाज रसिख सलाम पर लगातार चौके लगाए। लेकिन जब वह आउट हुए, तो रसिख ने कान के पास हाथ ले जाकर हैदराबाद की भीड़ की तरफ इशारा किया।
उस समय कैमरा विराट कोहली पर गया और वह काफी pumped-up नजर आए। विराट ने जोरदार सेलिब्रेशन किया। यानी पहली चिंगारी वहीं लग चुकी थी। बाद में दूसरी पारी में वही एग्रेसन बैंटर में बदला और फिर विवाद बन गया।
क्या हैंडशेक होना चाहिए था?
प्रैक्टिकल और स्पोर्ट्समैनशिप वाले नजरिए से देखें तो हां, हैंडशेक हो जाना चाहिए था। क्योंकि क्रिकेट में स्लेजिंग, छेड़छाड़ और aggression खेल का हिस्सा हैं। खासकर ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ियों के साथ तो यह और भी सामान्य है। लेकिन मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ी अक्सर सारी बातें मैदान में छोड़ देते हैं। अगर विराट और ट्रेविस हाथ मिला लेते, तो शायद यह पूरा मामला अगले दिन की हेडलाइन नहीं बनता।
आखिर गलत कौन था?
सच कहें तो यह मामला “सही या गलत” से ज्यादा दो अलग क्रिकेटिंग माइंडसेट का टकराव था।
* ट्रेविस हेड ने ऑस्ट्रेलियन अंदाज में जवाब दिया।
* विराट ने इमोशनल रिएक्शन दिया।
* फैंस ने इसे अपनी-अपनी पसंद के हिसाब से देखा।
अगर पूरी घटना को न्यूट्रल नजरिए से देखें, तो ट्रेविस का कमेंट बैंटर था, जबकि विराट का हैंडशेक न करना थोड़ा पर्सनल लगा। लेकिन इसे बहुत बड़ा विवाद बना देना भी शायद ओवररिएक्शन है।
क्योंकि अंत में यही क्रिकेट है — यहां एग्रेसन भी है, इमोशन भी है और ईगो क्लैश भी।
और शायद यही वजह है कि Indian Premier League दुनिया की सबसे एंटरटेनिंग क्रिकेट लीग मानी जाती है।

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