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इंडियन मीडिया vs YouTube टीचर्स: क्या ऑनलाइन एजुकेटर्स छात्रों की सबसे बड़ी आवाज बन चुके हैं ?

  


भारत में डिजिटल एजुकेशन के बढ़ते दौर में YouTube टीचर्स लाखों छात्रों की पढ़ाई का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं, वहीं दूसरी ओर, हाल ही में कुछ मीडिया बहसों में ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों को लेकर विवादित टिप्पणियां सामने आईं, जिसने छात्रों और शिक्षकों के बीच बड़ी चर्चा छेड़ दी।

सवाल यह है कि क्या ऑनलाइन एजुकेटर्स केवल व्यूज़ के लिए कंटेंट बनाते हैं, या फिर वे शिक्षा व्यवस्था की कमियों को पूरा कर रहे हैं?


YouTube ने बदल दिया पढ़ाई का तरीका

कुछ साल पहले तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग ही मुख्य विकल्प मानी जाती थी। लेकिन आज YouTube और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने शिक्षा को हर छात्र तक पहुंचाने का काम किया है।

आज लाखों विद्यार्थी घर बैठे—

UPSC की तैयारी कर रहे हैं।

NEET और JEE की पढ़ाई कर रहे हैं।SSC, Banking और Railway जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं,मुफ्त में  शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।यही कारण है कि ऑनलाइन एजुकेशन लगातार लोकप्रिय होती जा रही है।


छात्रों के मुद्दों पर सबसे ज्यादा कौन बोलता है?

पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक, परीक्षा स्थगित होने और तकनीकी समस्याओं जैसे मुद्दे सामने आए हैं,ऐसे समय में अनेक ऑनलाइन एजुकेटर्स और शिक्षकों ने सोशल मीडिया और YouTube के माध्यम से छात्रों की समस्याओं को उठाया। कई बार इन विषयों पर ऑनलाइन अभियान भी चलाए गए।इसी वजह से बड़ी संख्या में छात्र उन्हें अपनी आवाज मानने लगे हैं।


मीडिया की भूमिका क्या होनी चाहिए?

लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। उसका मुख्य उद्देश्य है—जनता तक सही जानकारी पहुंचाना,महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना,सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना,आम लोगों की समस्याओं को आवाज देना,जब किसी वर्ग या समुदाय पर टिप्पणी की जाती है, तो उसका प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ सकता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर शब्दों का चयन जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।


क्या ऑनलाइन टीचर्स केवल कंटेंट क्रिएटर हैं?

आज कई ऑनलाइन शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। अनेक शिक्षकों द्वारा—मुफ्त शिक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं।डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की सहायता की जा रही है।करियर गाइडेंस और मोटिवेशन भी दिया जा रहा है।इसलिए ऑनलाइन एजुकेटर्स की भूमिका केवल वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रह गई है।


भारतीय शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां

आज भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को अतिरिक्त अध्ययन करना पड़ता है।

मुख्य चुनौतियां हैं—बढ़ती प्रतियोगिता,महंगी कोचिंग,ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी,परीक्षा संबंधी अनिश्चितताएं,गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की उपलब्धता,ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म छात्रों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरे हैं।


मीडिया और डिजिटल एजुकेशन: टकराव नहीं, सहयोग जरूरी

मीडिया और शिक्षकों का उद्देश्य समाज को बेहतर बनाना होना चाहिए।यदि मीडिया छात्रों की समस्याओं को मजबूती से उठाए और ऑनलाइन एजुकेटर्स शिक्षा को बेहतर बनाने का काम करें, तो इसका सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलेगा।


निष्कर्ष

YouTube टीचर्स और भारतीय मीडिया की तुलना करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों की अपनी अलग भूमिका है। मीडिया की जिम्मेदारी है, जबकि शिक्षकों की जिम्मेदारी है छात्रों का भविष्य संवारना।


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